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Sunday, March 27, 2016

आज मुझे उस बूढ़ी अलमारी के अन्दर पुराना इतवार मिला है

Wah ! Gulzaar Sahib
Aap Bhi Kamaal Likhte Ho
:-

"आज मुझे उस बूढ़ी अलमारी के अन्दर पुराना इतवार मिला है.........

जाने क्या ढूँढने खोला था
उन बंद दरवाजों को,
अरसा बीत गया सुने,
उन धुंधली आवाजों को,
यादों के सूखे बागों में,
जैसे एक गुलाब खिला है।

आज मुझे उस बूढ़ी अलमारी के अन्दर,
पुराना इतवार मिला है........

कांच के एक डिब्बे में कैद,
खरोचों वाले कुछ कंचे,
कुछ आज़ाद इमली के दाने,
इधर उधर बिखरे हुए,
मटके का इक चौकोर,
लाल टुकड़ा,
पड़ा बेकार मिला है।

आज मुझे उस बूढ़ी अलमारी के अन्दर,
पुराना इतवार मिला
है......

एक भूरे रंग की पुरानी कॉपी,
नीली लकीरों वाली,
कुछ बहे हुए नीले अक्षर
उन पुराने भूरे पन्नों में,
स्टील के जंग लगे, शार्पनर में,पेंसिल का,
एक छोटा टुकड़ा गिरफ्तार मिला है।

आज मुझे उस बूढी अलमारी के अन्दर,
पुराना इतवार मिला
है...

बदन पर मिट्टी लपेटे
एक गेंद पड़ी है,
लकड़ी का एक बल्ला
भी है,
जो नीचे से छिला
छिला है,
बचपन फिर से आकर
मानो साकार मिला है।

आज मुझे उस बूढ़ी अलमारी के अन्दर,
पुराना इतवार मिला
है.........

एक के ऊपर एक पड़े,
माचिस के कुछ खाली डिब्बे,
बुना हुआ एक
फटा सफ़ेद स्वेटर,
जो अब नीला नीला है,
पीला पड़ चुका झुर्रियों वाला
एक अखबार मिला है।

आज मुझे उस बूढ़ी अलमारी के अन्दर,
पुराना इतवार मिला
है.........

गत्ते का एक चश्मा है,
पीली प्लास्टिक वाला,
चंद खाली लिफ़ाफ़े,
बड़ी बड़ी डाक टिकिटों वाले,
उन खाली पड़े लिफाफों में भी,
छुपा हुआ एक इंतज़ार मिला है।

आज मुझे उस बूढ़ी अलमारी के अन्दर,
पुराना इतवार मिला
है..........

मेरे चार दिन रोने के बाद,
पापा ने जो दी थी,
वो रुकी हुई घड़ी,
दादाजी की डायरी
से चुराई गयी,
वो सूखी स्याही
वाला कलम,मिला है,
दादी ने जो पहले जन्मदिन पे
दिया था वो श्रृंगार
मिला है।

आज मुझे उस बूढ़ी अलमारी के अन्दर,
पुराना इतवार मिला
है........

कई बरस बीत गए
आज यूँ महसूस हुआ,
रिश्तों को निभाने की
दौड़ में
भूल गये थे जिसे,
यूँ लगा जैसे वही बिछड़ा
पुराना यार मिला है।

आज मुझे उस बूढ़ी अलमारी के अन्दर,
पुराना इतवार मिला
है..........

आज मुझे उस बूढ़ी अलमारी के अन्दर अपना पुराना इतवार मिला!"

Friday, March 25, 2016

सुख

❗ ऐ   "सुख"  तू  कहाँ  मिलता  है
क्या.  तेरा  कोई.  स्थायी.  पता.  है

❗क्यों  बन  बैठा  है.  अन्जाना
आखिर. क्या  है  तेरा  ठिकाना।

❗कहाँ   कहाँ.   ढूंढा.  तुझको
पर.  तू  न.  कहीं  मिला  मुझको

❗ढूंढा.  ऊँचे   मकानों.  में
      बड़ी  बड़ी   दुकानों.  में
      स्वादिस्ट   पकवानों.  में
     चोटी.  के.  धनवानों.  में

❗वो  भी  तुझको.  ढूंढ.  रहे  थे
बल्कि  मुझको. ही  पूछ.  रहे.  थे

❗क्या  आपको  कुछ  पता   है
  ये  सुख आखिर  कहाँ  रहता  है?

❗मेरे. पास. तो. "दुःख" का पता था
जो  सुबह  शाम. अक्सर. मिलता  था

❗परेशान  होके  रपट   लिखवाई
पर  ये  कोशिश  भी  काम न  आई

❗उम्र   अब   ढलान.   पे.   है
        हौसले    थकान.   पे.   है

❗हाँ  उसकी. तस्वीर  है  मेरे. पास
       अब.  भी.  बची  हुई.  है  आस

❗मैं.  भी.  हार    नही    मानूंगा
  सुख.  के.  रहस्य   को.   जानूंगा

❗बचपन.  में   मिला  करता   था
     मेरे    साथ   रहा    करता.   था

❗पर. जबसे.  मैं  बड़ा   हो.  गया
मेरा.  सुख   मुझसे  जुदा.  हो  गया।

❗मैं  फिर  भी.  नही  हुआ  हताश
       जारी   रखी    उसकी    तलाश

❗एक. दिन. जब  आवाज. ये आई
   क्या. मुझको.   ढूंढ.  रहा  है   भाई

✅ मैं.  तेरे.  अन्दर  छुपा.  हुआ.  हूँ
   तेरे.  ही.  घर.  में.  बसा.  हुआ.  हूँ

❗मेरा. नही.  है  कुछ.  भी  "मोल"
  सिक्कों.   में.  मुझको.   न.   तोल

❗मैं.  बच्चों.  की.  मुस्कानों. में  हूँ
       हारमोनियम  की.  तानों  में.  हूँ

❗पत्नी.  के. साथ  चाय.  पीने.  में
       "परिवार"   के.  संग.  जीने.   में

❗माँ.  बाप   के.  आशीर्वाद   में
      रसोई   घर   के  पकवानों  में

❗बच्चों  की  सफलता  में   हूँ
माँ   की  निश्छल  ममता  में  हूँ

❗हर  पल  तेरे  संग   रहता हूँ
और अक्सर  तुझसे   कहता  हूँ

❗मैं   तो  हूँ   बस  एक "अहसास"
       बंद  कर   दे   तु  मेरी   तलाश

❗जो  मिला  उसी  में  कर  "संतोष"
आज  को जी  ले  कल  की न  सोच

❗कल के लिए आज को न खोना
  मेरे  लिए  कभी   दुखी  न  होना ।
🌹🌹🌹🌹🌹